पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत
हरियाणा सरकार, केंद्र और सीबीआई को नोटिस जारी मांगा जवाब, स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी

सत्य खबर हरियाणा
Dushyant Chautala V/s Hisar Police : 17 अप्रैल से हिसार पुलिस के साथ चल रहे दुष्यंत चौटाला के विवाद में आज दुष्यंत चौटाला को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से उस समय बड़ी राहत मिली जब हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार, केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच ब्यूरो को नोटिस जारी कर पूरे मामले में विस्तृत जवाब तलब कर लिया। अदालत में इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है और साथ ही यह भी पूछा है की याचिका करता को जांच प्रक्रिया में किस आधार पर शामिल नहीं किया गया है।

आज अदालत में सुनवाई के दौरान दुष्यंत चौटाला के अधिवक्ता विनोद भाई ने अदालत को बताया कि वह पूरी तरह से जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है लेकिन अब तक जांच कर रही एसआईटी ने उन्हें कोई नोटिस जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार बिना प्रक्रिया अपने मामले को लंबित रखना कानून के स्थापित सिद्धांतों के खिलाफ है। वरिष्ठ वकील ने अदालत के समक्ष यह भी दलील रखी कि जांच एजेंसियों द्वारा अब तक अपनाया गया रवैया न केवल प्रक्रिया संबंधी सवाल खड़े करता है, बल्कि इससे निष्पक्ष जांच की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लगता है। उन्होंने कहा कि जब तक याचिकाकर्ता को आधिकारिक रूप से जांच में शामिल होने का अवसर ही नहीं दिया गया, तब तक उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रतिकूल धारणा उचित नहीं मानी जा सकती।
क्या कहा कोर्ट ने
दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए हरियाणा सरकार, भारत सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी कर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के आदेश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच की वर्तमान स्थिति, एसआईटी की कार्रवाई, नोटिस जारी करने अथवा न करने के कारण तथा आगे की प्रक्रिया को लेकर पूरा ब्यौरा रिकॉर्ड पर लाया जाए।
क्या है दुष्यंत की याचिका
दुष्यंत चौटाला ने कोर्ट को बताया कि वह वाई-प्लस सुरक्षा श्रेणी के तहत संरक्षित हैं, बावजूद इसके इस तरह की घटना होना बेहद गंभीर है। याचिका के अनुसार, उनके पर्सनल सिक्योरिटी आफिसर्स ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए अलग-अलग शिकायतें दी हैं, जिनमें जान से मारने की धमकी तक का जिक्र है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस घटना के बाद हरियाणा पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उनके परिजनों और समर्थकों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर दबाव बनाने की कोशिश की। खास तौर पर 7 अप्रैल की एक घटना को आधार बनाकर दर्ज एफआईआर को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया गया है। दुष्यंत चौटाला ने कोर्ट के समक्ष यह भी दलील दी कि घटना के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और न ही एफआईआर दर्ज की गई।
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